ऐसा क्यों कहा जाता है कि कुछ अच्छा होने से पहले बहुत बुरा होता है ?

कभी-कभी जीवन के सबसे अंधेरे पल ही वह भोर बनते हैं, जो आने वाले उजाले का संकेत देते हैं।
परंतु जब अंधकार छा जाता है – तो हम उसे अंत मान लेते हैं, जबकि वह केवल शुरुआत होती है।
यही कारण है कि कहा गया है –
“कुछ अच्छा होने से पहले बहुत बुरा होता है।”
पर क्या सचमुच “बुरा” कुछ होता है?
या फिर यह केवल उस तैयारी का दौर है, जिसे ईश्वर स्वयं हमारे लिए रच रहा है…

पहली कथा – बारिश से पहले की तपिश

सोचिए…
धरती की गोद सूख चुकी है, नदियाँ थक चुकी हैं, पक्षी प्यास से व्याकुल हैं।
हर प्राणी आकाश की ओर देख रहा है – बादलों का एक टुकड़ा भी दिखाई नहीं देता।
हवा गर्म है, जैसे कोई तपता हुआ तवा धरती पर रखा हो।
हर कोई कहता है – “क्या भयावह समय है!”

परंतु उसी समय, कहीं ऊपर, सूर्य की यही तपिश समुद्र से जल खींच रही है।
बादल जन्म ले रहे हैं, तैयार हो रहे हैं, बरसने के लिए, जीवन देने के लिए।
मनुष्य जिसे “बुरा” समझ रहा था, वही तो “अच्छे” की नींव रख रहा था।
यही प्रकृति का रहस्य है, विनाश के बिना सृजन नहीं होता।

दूसरी कथा – पतझड़ और फुलवारी का रहस्य

हर पेड़ जब अपने पत्तों को गिराता है, तो लगता है जैसे वह मर रहा हो।
हर डाल सूनी, हर कोना सूना – हवा चलती है तो सूखे पत्तों की आवाज़
कानों में गूँजती है जैसे कोई विदाई का गीत।
लोग कहते हैं – “क्या वीरान समय है!”

परंतु प्रकृति मुस्कराती है –
क्योंकि वह जानती है कि यह पतझड़ नहीं, पुनर्जन्म है।
यह धरती अपने भीतर शक्ति संचित कर रही है, ताकि कुछ ही दिनों बाद
नई कोपलें फूटें, नए फूल महकें, नया जीवन जन्म ले।
इसलिए जब कुछ गिरता है, टूटता है, तो समझिए कि
अब कुछ और सुंदर खिलने वाला है।

तीसरी कथा – कर्म का विज्ञान

कभी-कभी जीवन में घटनाएँ ऐसी घटती हैं, जो हमें झकझोर देती हैं।
व्यवसाय टूट जाता है, प्रियजन छूट जाते हैं, योजनाएँ असफल हो जाती हैं।
और मन प्रश्न करता है – “भगवान, मेरे साथ ही क्यों?”

परंतु जो हमें “दुःख” लगता है, वह केवल कर्मों का निपटारा है।
जैसे सोने को शुद्ध करने के लिए आग में तपाया जाता है,
वैसे ही आत्मा को भी अपने पिछले कर्मों की धूल से मुक्त होना होता है।
जब तक पाप कर्मों का ऋण समाप्त नहीं होता,
तब तक पुण्य कर्मों का फल नहीं मिलता।
तो जब जीवन में “बुरा समय” आता है,
तो समझिए कि ईश्वर स्वयं आपकी आत्मा को शुद्ध कर रहे हैं –
आपको तैयार कर रहे हैं उस “अच्छे समय” के लिए,
जिसकी सुगंध दूर तक फैलेगी।

भक्त और दृष्टिकोण

भगवत भक्त का दृष्टिकोण भिन्न होता है।
जहाँ सामान्य मनुष्य गर्मी में तपता है, वहीं भक्त कहता है –
“यह तो वर्षा की तैयारी है।”
जहाँ लोग दुःख में विलाप करते हैं, वहाँ भक्त कहता है –
“यह तो प्रभु का छिपा हुआ आशीर्वाद है।”

क्योंकि भक्त जानता है –
जो हो रहा है, वह मेरे लिए नहीं, मेरे भीतर के विकास के लिए हो रहा है।
जो तूफान मुझे गिराता है, वही मेरे पंखों को उड़ना सिखाता है।
जो अंधकार मुझे डराता है, वही मुझे दीपक बनने की प्रेरणा देता है।

इसलिए जब जीवन में सब कुछ उल्टा लगने लगे,
जब सब रास्ते बंद दिखाई दें,
तो घबराइए मत…
क्योंकि यही वह क्षण है जब सृष्टि आपके लिए
नई सुबह की पटकथा लिख रही होती है।

हर तपिश के पीछे वर्षा है,
हर पतझड़ के पीछे फुलवारी है,
हर दुःख के पीछे प्रभु की योजना है –
आपको उस रूप में गढ़ने की,
जिस रूप में आप स्वयं को कभी सोच भी नहीं सकते।

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