“जहाँ अग्नि कभी बुझी नहीं – मणिकर्णिका का अनंत रहस्य” ?

काशी के हृदय में, जहाँ गंगा की लहरें भी मंत्रोच्चारण सी लगती हैं, वहाँ एक स्थान है,
एक ऐसा स्थल, जहाँ रात और दिन का कोई अर्थ नहीं,
क्योंकि यहाँ अग्नि सदैव जागती है।
वह है, मणिकर्णिका घाट। यह है काशी, यह है अनंत का द्वार, यह है मोक्ष की राजधानी

यहाँ 24 घंटे चिताएँ जलती हैं, पर वह अग्नि देह नहीं जलाती, बंधन जलाती है।
वह राख नहीं बनाती, मुक्ति बनाती है।
कहते हैं, यह केवल श्मशान नहीं, यह मोक्ष का द्वार है।
क्योंकि इस भूमि पर स्वयं महादेव निवास करते हैं।
यह वह स्थान है जहाँ मृत्यु भी अमरत्व को स्पर्श करती है।

यह वही स्थान है जहाँ माता सती के कान की मणि गिरी थी।
धरती काँप उठी थी, और उस दिन से यह भूमि देवी की देह का अंग बन गई।
माता ने कहा,
“जहाँ मेरी मणि खोई है, वहाँ अग्नि कभी बुझेगी नहीं।”
और आज तक, हजारों वर्षों से, वह अग्नि बोलती है,
“मैं हूँ मणिकर्णिका, अनंत की साक्षी।”

दूसरी कथा सुनिए,
भगवान शंकर सदा अपने भक्तों में रमण करते थे।
देवी पार्वती ने कहा,
“स्वामी, आपको विश्राम नहीं मिलता?”
भोले मुस्कुराए, “भक्त बुला लेते हैं, पार्वती।”
देवी ने मणिकर्णिका में अपनी मणि छिपा दी,
“अब जब तक मणि न मिले, यहीं रहिए।”
और तब से शिव स्वयं इसी भूमि पर प्रत्येक शव से पूछते हैं,
“क्या तूने मेरी मणि देखी?”
हर चिता की लपट में, वह प्रश्न आज भी गूंजता है।

जब मणिकर्णिका में शवों की पंक्ति लगती है, जब चिता की ज्वाला आसमान छूती है,
तो धुआँ नहीं उठता, शिव का तांडव उठता है।
भस्म उड़ती है, और लगता है मानो स्वयं काल नृत्य कर रहा हो।
तभी घाट पर गूंजती है एक गहरी आवाज़,
“जय बाबा मसान नाथ की जय!”
यहाँ जीवन और मृत्यु एक साथ नृत्य करते हैं।
यहाँ चिता की ज्वाला में, समय भी थरथरा उठता है।

और फिर आता है वह दिन, जब होली के रंग नहीं, भस्म उड़ती है।
मसान की भूमि पर गण नृत्य करते हैं,
“खेले मसाने में होरी दिगम्बर…”
शिव स्वयं उतरते हैं, और राख में स्नान करते हैं।
यहाँ कोई डर नहीं, कोई शोक नहीं, केवल अनंत का उत्सव है।

काशी का श्मशान वह स्थान है जहाँ
शरीर भस्म होता है, पर आत्मा जलती नहीं।
जहाँ मृत्यु को देखकर भी मन शांत होता है।
जहाँ पाप नहीं, केवल बोध जलता है।
जहाँ अग्नि जलकर भी ज्ञान की ज्योति बन जाती है।

यह वही काशी है जहाँ हर ज्वाला एक मन्त्र है,
हर राख एक उपदेश,
हर शव एक शिष्य,
और हर अग्नि, स्वयं शिव का आलिंगन।

काशी में मरन सहज है,
पर काशी का दर्शन दुर्लभ है,

क्योंकि यह धरती केवल आँखों से नहीं,
आत्मा से देखी जाती है।

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