“जब वृंदावन ने तीन बार ईश्वर को जन्म लेते देखा” ?
वृंदावन की पृष्ठभूमि वृंदावन की वह सुबह, जहाँ कुहासे के पार से झाँकती सूरज की पहली किरणें यमुना के जल पर सुनहरी लकीर खींच रही हों, मृदंग की थाप दूर से आ रही हो, कहीं मोर अपने पंख फैला रहा हो, और ताजी तुलसी की सुगंध हवा में घुल रही हो। वहीं, इस धरा पर…